‘अटल वापस जाओ, भारत की जनता को बताओ मैंने जम्मू-कश्मीर में परिमट सिस्टम को ध्वस्त कर दिया है’

भारतीय जनसंघ के संस्थापक और इसके पहले अध्यक्ष डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज 68वीं पुण्यतिथि है. भारतीय जनसंघ जिसे अभी भारतीय जनता पार्टी के नाम से जानी जाती है. श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश की पहली सरकार में केंद्रीय मंत्री थे लेकिन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से कई मुद्दों पर मतभेद के चलते मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और कांग्रेस के विपरीत राजनीतिक धारा की शुरुआत की.

आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर जाने के लिए किसी भी भारतीय को परमिट की आवश्यकता पड़ती थी. अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष राज् के दर्जे के चलते इस राज्य में भारत का संविधान लागू नहीं था. डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसका पुरजोर विरोध किया. उनका कहना था कि एक देश में दो संविधान नहीं चल सकते हैं. मुखर्जी ने ऐलान किया कि वो जम्मू-कश्मीर बिना किसी परमिट के जाएंगे. 22 जून 1953 को उन्होंने राज्य में प्रवेश कर लिया और उन्हें वहीं पर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया. लेकिन अगले ही दिन उनकी मौत की खबर आ गई.

उनकी मौत के बाद तत्कालीन सरकार ने क्या किया और उनकी मां ने चिट्ठी लिखकर उस समय के प्रधानमंत्री नेहरू को चिट्ठी में क्या लिखा था, ये बताने से पहले आपको उनकी निजी जिंदगी के बारे में जानना जरूरी है.

साल 1901, तारीख 6 जुलाई को श्यामा प्रसाद का जन्म कोलकाता के एक सभ्रांत परिवार में हुआ था. उनके पिता आशुतोष मुखर्जी बंगाल के बुद्धजीवियों में थे. कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक करने के बाद 1926 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी सीनेट के सदस्य बने और अगले ही साल 1927 में बैरिस्टरी की परीक्षा पास कर ली. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 33 साल की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने जो कि कम उम्र में इस पद पर पहुंचने का रिकॉर्ड है.

इस पद पर चार साल रहने के बाद वो विधानसभा पहुंचे. इसके बाद वो पंडित नेहरू की अंतरिम सरकार में मंत्री बने लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगाकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर पंडित नेहरू को घेरते हुए कहा, ‘एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चलेंगे.”

श्यामा प्रसाद मुखर्जी को प्रखर राष्ट्रवादी थे और वो पंडित नेहरू की जम्मू-कश्मीर की धुलमुल नीतियों से खुश नहीं थे.

जब 23 जून 1953 को रहष्यमयी परिस्थितियों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की खबर आई तो पूरा देश सन्न रह गया. उनकी मां जोगमाया देवी ने पंडित नेहरू से इसकी जांच कराने के लिए चिट्ठी लिखी लेकिन सरकार ने इसे स्वाभाविक मौत करार दे दिया.

आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने के दौरान उनके साथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी थे. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उनको 22 जून की रात को ही ये कहकर वापस लौटने के लिए कहा कि वो पूरे देश-दुनिया को बताएं जाकर कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर के परमिट सिस्टम को ध्वस्त कर दिया है.

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