यूपी पंचायत चुनाव : ऐहार में कौन पड़ेगा किस पर भारी?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर प्रचार अपनी चरम सीमा पर है. इसी कड़ी में ऐहार गांव में भी ग्राम प्रधान की कुर्सी के दावेदारों जनसंपर्क तेज कर दिया है. इस बार के चुनाव में ग्रामसभा ऐहार से कई लोगों ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. अभी तक जो नाम सामने आए हैं उनमें निर्वतमान ग्राम प्रधान के परिवार से मुकेश सिंह, पूर्व प्रधान राजकिशोर सिंह, पूर्व फौजी राजेश यादव, स्थानीय नेता मोनू मिश्र के भाई रिंकू मिश्र, युवा नेता के रूप में काजल त्रिवेदी और कई बार से दावा ठोक रहे सधन शुक्ल मैदान में हैं.

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क्या है समीकरण
सामान्य सीट होने की वजह से इस बार भी समीकरण काफी उलझे हुए हैं. आम तौर पर जब आरक्षित सीट होती है तो यहां चुनाव ऐहार बनाम बाल्हेमऊ हो जाता है. लेकिन सामान्य सीट होने पर ऐहार और बाल्हेमऊ की सीट का रंग तो दिया जाता है लेकिन वास्तव में दोनों ओर से इतने प्रत्याशी खड़े हो जाते हैं कि ये बता पाना मुश्किल हो जाता है कि पलड़ा किसका भारी है. हालांकि सामान्य सीट होने पर बाल्हेमऊ वाले प्रत्याशियों का पलड़ा भारी हो जाता है. क्योंकि अभी तक देखा गया है कि ऐसी स्थिति में बाल्हेमऊ से खड़े प्रत्याशी जीत जाते हैं और उनकी जीत में ऐहार के भी वोटों की खासी संख्या रहती है. लेकिन इस बार बाल्हेमऊ क्षेत्र से भी कई दमदार प्रत्याशी खड़े हो गए हैं. ऐसी स्थिति में जो भी प्रत्याशी एक दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब होगा उसी की जीत तय है.

कितनी है ऐहार ग्राम पंचायत की जनसंख्या
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक 7,502 जनसंख्या है. जिसमें पुरुषों की आबादी 3,920 और महिलाओं की आबादी 3,582 है. कुल 1,337 घर हैं. ऐहार गांव जिले की सरेनी विधानसभा के अंतर्गत आता है और यह गांव लालगंज कस्बे से 6 किलोमीटर की दूरी पर है.

क्या गांव की बड़ी समस्याएं
बड़ी आबादी होने के बावजूद भी गांव के आसपास कोई स्तरीय डिग्री कॉलेज नहीं है. जिसकी वजह से गांव के छात्र-छात्राओं को लालगंज कस्बे की ओर जाना पड़ता है. गांव के पास ही सरकारी सहायता प्राप्त इंटरकॉलेज है लेकिन उसकी भी हालात कोई खास अच्छी नहीं है. यह कॉलेज पढ़ाई की वजह से कम राजनीति, आपसी वर्चस्व का अखाड़ा बन गया है. गर्मी के दिनों में गांव में भीषण बिजली कटौती ग्रामीणों को हर साल झेलना पड़ता है. नालियों की साफ-सफाई भी कई-कई सालों तक नहीं होती है. सरकारी राशन वितरण में भी कई बार धांधली का आरोप लग चुका है. गांव में कई प्राइमरी स्कूल भी हैं जिनकी हालत पहले से ठीक है लेकिन इनमें पढ़ाई का स्तर आज तक नहीं सुधर पाया है.

सुरक्षा व्यवस्था और नशे का सिंडीकेट
गांव में सुरक्षा व्यवस्था भी एक बड़ा मुद्दा है. आए दिन मारपीट और एक दूसरे को देख लेने की धमकियां दी जाती हैं. इन घटनाओं की सबसे बडी वजह नशा भी है. गांव के युवक इस समय ड्रग्स और कई तरह के नशे का शिकार बन चुके हैं. नशे की लत की वजह से कई लोगों ने अपनी जान भी गंवाई है लेकिन नशे का कारोबार करने वाले सिंडेकेट पर आज तक लगाम नहीं लगाई जा सकी है.

खंडहर बन गया है पंचायत घर
गांव का पंचायत घर खंडहर बन चुका है. खास बात ये है कि पंचायत घर की दो-दो इमारतें खड़ी हैं. एक पुरानी है और दूसरी कुछ साल पहले ही बनवाई गई थी. लेकिन दोनों की हालत बता रही है कि गांव में पंचायत व्यवस्था की क्या हालत है. गांव के किसी व्यवस्था को ठीक करने के लिए पंचायत की आखिरी बैठक कब हुई थी शायद ही कोई जानता है.

पुलिस के दलालों का अड्डा बन गया है ऐहार
ऐहार में कई केस ऐसे भी सामने आए हैं जहां पर पुलिस को भी स्थानीय दलालों ने मैनेज करने काम किया गया है. नाम न बताने की शर्त पर कई ग्रामीणों ने बताया है कि कुछ ऐसे लोग हैं जिन्होंने स्थानीय कांस्टेबलों को साध रखा है और उनकी मदद लेकर आपसी विवादों में हस्तक्षेप करते हैं इन मामलों में पैसे का भी लेन-देन होता है.

रेलकोच फैक्टरी की वजह से आ गई रौनक
इस गांव के अंतर्गत रायबरेली रेलकोच फैक्टरी आती है. इस फैक्टरी की वजह से यहां पर दूर-दूर से लोग रोजगार के लिए आते हैं. साथ ही यहां पर स्थानीय युवा भी बड़ी संख्या में रोजगार से जुड़े हुए हैं.

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