ब्राह्मणों को लेकर हो रही सियासत के मुंह पर जोरदार थप्पड़ हैं ऐहार के गांव के जर्जर तार

(गांव में कुछ दिन पहले ही इन खंबो को लाया गया है)

उत्तर प्रदेश में इस समय ब्राह्मणों को लुभाने के लिए तरह-तरह की कवायद जारी है. लेकिन रायबरेली के ऐहार गांव (ब्राह्मण बहुल) में बीते 60 सालों से जर्जर तारों को बदलवाने के लिए ग्रामीणों का संघर्ष अब भी जारी है. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के बाद बिजली विभाग ने बिना कुछ किए ही कार्य के निस्तारित हो जाने के जवाब दे दिया था.

इस पर जब बिजली विभाग के कर्मचारियों से पूछा गया तो उनका कहना था कि एल एंड टी नाम की कंपनी को ठेका जारी कर दिया गया है और अब यहां से सरकारी विभाग की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है अब यह संस्था कितने समय में काम को पूरा करती है ये उसके ऊपर निर्भर करता है. आपको जानकार हैरानी होगी कि ये जवाब ऐसे समय में दिया गया है जब ग्रामीणों की ओर से गुहार में ये कहा गया था कि तारों को जल्दी बदलवाया जाए क्योंकि ये गांव के मुख्यमार्ग से गुजरते हैं और चलती लाइन में अगर कभी किसी के ऊपर गिर गए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है. अब सवाल ये है कि क्या सरकारी विभाग किसी दुर्घटना के हो जाने और फिर मुआवजा बांटने का इंतजार कर रहा है.

हालांकि गांव में 50-60 खंबे कहीं से लाकर गिराए गए हैं और बताया जा रहा है कि अगस्त में इस काम को पूरा कर लिया जाएगा लेकिन इसके बाद से किसी का भी कोई अता-पता नहीं है.

जिस तरह से प्रदेश में यूपी चुनाव से पहले ब्राह्मणों को लुभाने के लिए नेता सम्मेलनों के जरिए गोटी बिछा रहे हैं, उसी समय ब्राह्मण बहुल इस गांव के लोगों की मांग को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इस समय कई पार्टियों के नेता गांव के ब्राह्मण युवाओं को लुभाने में जुटे हैं लेकिन इस मूलभूत समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. गांव के ही रहने वाले एक बुजुर्ग का कहना कि ब्राह्मणों के वोट सबको चाहिए लेकिन सुनवाई कहीं नही है.

ऐहार में ब्राह्मणों के अलावा तमाम अन्य जाति को लोगों के भी घर हैं. गांव के मुख्य रास्ते से कई दूसरे गांवों को लोग भी हजारों की संख्या में गुजरते हैं. लोगों का कहना है दुर्घटना समय और जाति देखकर नहीं आती है. उनका कहना है कि ब्राह्मणों को लेकर हो रही है राजनीति सिर्फ वोटों के लिए है. बीते कई सालों से हर सरकार के नेता, विधायक और सांसदों से इस काम के लिए गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

गांव के ही रहने वाले अतुल का कहना है कि जिन नेताओं को ब्राह्मणों को लेकर इतनी ही चिंता है तो तार बदलवाने के लिए धरने पर क्यों नहीं बैठ जाते हैं. अतुल के ही सुर में सुर मिलाते कई ग्रामीणों ने कहा कि प्रदेश में जाति के नाम पर हो रही गोलबंदी से उनका कोई लेनादेना नहीं है. लेकिन गांव के तार जरूर बदले जाएं ताकि कोई दुर्घटना न हो.

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