ऐहार इंटर कॉलेज: भ्रष्टाचार, लॉबिंग, नए प्रबंधक के सामने ढेरों चुनौतियां

रायबरेली जिले के ऐहार गांव के श्री गणेश विद्यालय इंटर कॉलेज के नए प्रबंधक कार्तिकेय शंकर वाजपेयी और सुमन मोहन त्रिपाठी (बाएं से) साधारण सभा का उपसभापति होंगे. प्रबंध समिति के दो सदस्यों के निधन के बाद रिक्त पदों को भरने के लिए सोमवार को जिला विद्यालय निरीक्षक के भेजे गए पर्यवेक्षक की देखरेख निर्वाचन कराया गया था.

इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार मिश्र ने बताया कि प्रबंधक उमाशंकर वाजपेयी व साधारण सभा के उपसभापति चंद्रशेखर दीक्षित के निधन के बाद से इन दो पदों के लिए योग्य लोगों का निर्वाचन होना था.

जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षक राजकीय इंटर कॉलेज रायबरेली के प्रधानाचार्य ब्रजेश श्रीवास्तव और देदौर इंटर कॉलेज से आए चुनाव अधिकारी शैवेंद्र कुमार भूषण की मौजूदगी में सोमवार को इस प्रक्रिया को पूरा किया गया.

जिसमें कार्तिकेय शंकर वाजपेयी को प्रबंधक और सुमन मोहन त्रिपाठी को साधारण सभा का उपसभापति चुना गया. इस मौके पर एडवोकेट रवीशंकर त्रिवेदी, पशुपतिशंकर वाजपेयी, अध्यक्ष बीना पांडेय, शैलेश त्रिवेदी, सीता मिश्रा, कमलनारायण शुक्ला, देवेंद्र मोहन त्रिपाठी, गजराज सिंह, गंगा प्रसाद यादव एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे.

नए प्रबंधक के सामने कई चुनौतियां
हालांकि इस जिम्मेदारी को लेने के बाद नए प्रबंधक के कार्तिकेय शंकर वाजपेयी के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है. स्कूल में शिक्षा का स्तर बीते कई दशकों से रसातल पर रचा गया है. विद्यालय की रोजाना गतिविधियों में तक में भ्रष्टाचार का आलम है.

लॉबिंग और नेतागीरी के भरोसे नौकरी
विद्यालय में काम करने वाले कुछ कर्मचारी नाम न बताने की शर्त पर बताते हैं कि भ्रष्टाचार का आलम ये है कि कुछ शिक्षकों को तो ये भी नहीं पता होगा कि वो जिस विषय को पढ़ाते हैं उसका सिलेबस क्या है. ऐसा इसलिए ये है क्योंकि ये शिक्षक पढ़ाने से ज्यादा बीएसए कार्यालय से लेकर लखनऊ में अधिकारियों के बीच लॉबिंग करके अपनी गोटी सेट करते रहते हैं. इतना ही नहीं पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी ऐसे लोग भड़काते रहते हैं.

ऐहार को ही मांगना होगा हिसाब
ये इंटर कॉलेज ऐहार गांव की धरोहर है. इस विद्यालय से पढ़कर कई छात्र आज बड़ी-बड़ी जगहों पर काम करते हैं और एक जमाना था कि इस कॉलेज में योग्य और ईमानदार शिक्षकों के चर्चे दूर-दूर तक होते थे. लेकिन प्रबंध समिति की राजनीति के चक्कर में इस कॉलेज की हालत खराब होती चली गई. यहां पर ऐहार और आसपास के गांवों के बच्चे पढ़ते हैं. जहां पर कम फीस में शिक्षा दी जाती है. हालांकि बिल्डिंग फीस जरूर वसूली जाती है. लेकिन अगर अब नए प्रबंधक के आने के बाद भी स्कूल की शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होता है तो अब ऐहार की जनता को ही अपनी धरोहर को बचाने के लिए एक दिन हिसाब मांगना होगा.

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