Delta Plus Variant: कर्मचारियों की जान खतरे में डाल मीडिया- आईटी कंपनियां बुला रही हैं ऑफिस, मौतें हुई तो कौन होगा जिम्मेदार

एक ओर जहां कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट के केस उत्तर प्रदेश में भी मिलना शुरू हो चुके हैं तो दूसरी दिल्ली-एनसीआर स्थिति मीडिया और आईटी कंपनियां अपने ऑफिस खोलकर वर्क फ्रॉम होम कर्मचारियों को बुला रही हैं. ऐसे में ये समझ में नहीं आ रहा है कि जो लोग घर में सुरक्षित रहकर 12-12 घंटे काम कर रहे हैं उनके जान जोखिम में क्यों डाली रही है.

जब से कोरोना संक्रमण शुरू हुआ है कई पत्रकार अपनी जान गंवा चुके हैं लेकिन नोएडा स्थिति कुछ मीडिया कंपनियां लापरवाह तरीके से अपने कर्मचारियों का जीवन खतरे में डाल रही हैं. हालांकि ये भी बात सच है कि 24 घंटे चलने वाले न्यूज चैनल और अखबारों के कुछ डिपार्टमेंट में आना जरूरी होता है. ऐसे में उन्हीं लोगों को ऑफिस बुलाना जाना चाहिए जिनके आए बिना काम न चले.

यही हाल आईटी कंपनियों का भी है जहां लगभग हर काम डिजिटल तरीके से ऑनलाइन हो सकता है. कई बड़ी कंपनियों ने तो वर्क फ्रॉम होम कल्चर को अपना रही हैं. पीएम मोदी भी कह चुके हैं कि कंपनियों को वर्क फ्रॉम कल्चर को अपनाना चाहिए.

वहीं जो कंपनियों अपने कर्मचारियों को बुला रही हैं उनमें से कई अपने दूर-दराज स्थित अपने घर चले गए हैं ऐसे में जब वे ट्रेन और बस से सफर करके आएंगे तो उनके संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाएगा और फिर वे ऑफिस में स्प्रेडर का काम कर सकते हैं. वहीं कहा ये जा रहा है कि जिन लोगों ने कोरोना की पहली डोज ली है उन्हें बुलाया जा रहा है. अ

ब सवाल इस बात का है जब न्यूज चैनल और अखबार ही एक्सपर्ट से बात करके बता रहे हैं कि डेल्टा प्लस वैरिएंट कोरोना वैक्सीन को भी बेअसर कर सकता है तो ये बात उनके कर्मचारियों पर नहीं लागू होती है क्या?

नोएडा और दिल्ली प्रशासन को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए कि क्या जो कंपनियां ऑफिस खोल रही हैं वो इन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर क्या इंतजाम और जिम्मेदारी ले रही हैं.

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