‘कारसेवकों पर गोली नहीं चलाऊंगा…’, कहकर राम मंदिर के लिए त्याग दी सत्ता और काटी सजा

साल 6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाई जा चुकी थी…उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने शाम को ही ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि वो कारसेवकों पर गोली नहीं चलाएंगे, नहीं चलाएंगे…. मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वादा किया गया था कि उनकी सरकार बाबरी मस्जिद की रक्षा करेगी. इस ढांचे के गिरते ही कल्याण सिंह ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सीएम पद से इस्तीफा दे दिया….

इस घटनाक्रम में जहां देश में हिंदुत्व की लहर अपने चरम पर पहुंच गई. वहीं कल्याण सिंह का बीजेपी में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के बराबर कद पहुंच गया. बाबरी मस्जिद गिरने की वजह से कल्याण सिंह ने एक दिन की जेल की सजा भी काटी और 26 साल तक मुकदमा भी झेला.

कल्याण सिंह को देखने पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ

इस पूरे घटनाक्रम के पहले क्या हुआ अगर इस पर नजर डालें तो जो प्रशासन 30 अक्टूबर 1990 को मुलायम सिंह यादव की सरकार में कारसेवकों पर गोली चला रहा था वही पुलिस 6 दिसंबर 1992 को मूकदर्शक बन गया था.

राममंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह ही एकमात्र ऐसे नेता थे जिन्होंने अपनी सरकार गंवाई और जेल की सजा भी काटी. लेकिन साल 2002 तक उग्र तेवर कल्याण सिंह बीजेपी में ही बागी हो गए. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री और बीजेपी के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपेयी को बुराभला कह दिया. पार्टी से उनको निकाल दिया. उन्होंने अयोध्या में गोली चलवाने मुलायम सिंह यादव से दोस्ती से कर ली. लेकिन कई सालों के वनवास के बाद कल्याण सिंह ने बीजेपी में फिर वापसी की है.

खबर आई है कि कल्याण सिंह की हालत गंभीर है और उनको पहले राममनोहर लोहिया फिर पीजीआई लखनऊ में भर्ती करवाया गया है. उनको देखने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेता पहुंच रहे हैं.

कल्याण सिंह को देखने पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह

आपको बता दें कि 5 जनवरी 1932 को अलीगढ़ में जन्मे कल्याण सिंह का जन्म हुआ था और शुरुआत से ही उनका झुकाव आरएसएस की ओर था. यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ध्वस्त हो चुकी बोर्ड परीक्षा में सुधार किया और नकल अध्यादेश लेकर आए. उनके कार्यकाल में प्रशासन पर भी सख्ती की गई.

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