श्श्श्श्श्श्श्श…श्रद्धा आप चुप रहिए…सेक्युलर फैब्रिक बिगड़ जाएगा…

(डॉक्टर माखनलाल बिंद्रू और उनकी बेटी प्रोफेसर श्रद्धा)

आप प्रोफेसर हैं. आपके पिता डॉक्टर थे. गरीबों का इलाज करते थे. लेकिन आपका दुख साझा करने के लिए कोई नहीं आएगा क्योंकि इससे देश का सेक्युलर फैब्रिक खतरे में पड़ सकता है. इसको बने रहने के लिए आप जैसों को कुर्बानियां होती रहनी चाहिए. धर्म पूछकर गोली मारना ‘सेक्युलर फैब्रिक’ वाली विचारधारा में कोई बड़ा अपराध नहीं है. भारतीय लिबरल्स इसको तब तक अपराध नहीं मानेंगे जब तक मरने वाला या पीड़ित हिंदू होगा. आपको उनकी सहानुभूति से ही काम चलाना होगा. ‘आतंक का धर्म नहीं होता है’ इसका उपदेश जारी रहेगा. आपके लिए न आर्टिकिल लिखा जाएगा और न न्यूयॉर्क टाइम्स में आपको जगह मिलेगी.

आपके लिए कोई अपनी स्क्रीन भी काली नहीं करेगा. न मीडिया में आपके न्याय के लिए कैंपेन चलाएगा, न कैंडिल मार्च निकलेगा. सेक्युलरिज्म के रेगिस्तान में आपके आंसुओं का कोई मोल नहीं है जो आपके लिए दुखी हैं वो देश में सांप्रदायिकता फैला रहे हैं. सेक्युलिरज्म फैब्रिक वालों से आप भी प्रभावित हो सकती हैं. हो सकता है आपके पिता की हत्या से जो दुखी हैं उन पर आप ही नाराज हो जाएं. फिर भी इस देश के बेचारे हिंदू ( बाभन-ठाकुर-बनिया, चमार-पासी, कोरी-कुर्मी और तमाम जातियों में बंटे लोग) दुखी रहेंगे लेकिन बोलेंगे अपनी-अपनी जातिगत सुविधा के हिसाब से.

आपको दुख अकेले ही सहना होगा क्योंकि विपक्ष आपके राज्य से शरिया कानून की सुविधा देने वाले अनुच्छेद 370 के हटने से नाराज है. फिर यूपी में चुनाव भी हैं इसलिए सारा फोकस अभी वहीं है. चुनाव नहीं होता तो भी क्या हो जाता. पहले किसने आप जैसों के आंसू पोंछे थे…बड़ी-बड़ी किताबों के लेखक सालों से आप जैसे कश्मीरी हिंदुओं को दोष दे रहे हैं. उनके सेक्युलर फैब्रिक में न पहले कोई असर था और न आज होगा…आपका कोई अधिकार नहीं है. आपके पास तो उस राज्य में नागरिक होने का भी हक नहीं है..कागजों में जरूर कहीं होगा…

आप गौरी लंकेश भी नही हैं…आपने कभी हिन्दुओं की कट्टरता के खिलाफ कुछ लिखा भी नहीं….आपके पिता ने भी गरीबों के इलाज के दौरान गजवा-ए-हिंद का ख्वाब नहीं पाला. न इलाज के दौरान किसी का धर्म पूछा…कम से कम इसी बहाने धर्मान्तरण के लिए प्रेरित करते और इसके समर्थकों का साथ तो दे ही सकते थे…. काश…आपने ये सब किया होता…

(श्रीनगर में डॉक्टर माखनलाल बिंद्रू की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. उनकी बेटी श्रद्धा बिंदरू ने आतंकवादियों को ललकारते हुए कहा है कि आतंकी कायर हैं हिम्मत है तो सामने आएं. इस घटना के बाद श्रीनगर में दो ही अध्यापकों को धर्म पूछकर गोली मार दी गई)

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