एसिम्टोमैटिक कोरोना : हमैं कबौ न होई…. इस गलतफहमी में न रहें, कई लोग गवां चुके हैं जान

अगर आप कोरोना को लेकर अति आत्मविश्वास के शिकार हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है. दरअसल कोरोनावायरस दो तरह से लोगों को जकड़ रहा है. पहले में लोगों को लक्षण साफ दिखाई देते हैं जिसमें खांसी, जुकाम, डायरिया और बाकी कई तरह के लक्षण हैं. इस तरह के लक्षण को सिम्टोमैटिक कहा जाता है.

लेकिन एक दूसरा लक्षण एसिम्टोमैटिक है. इसमें रोगी को कोई लक्षण नहीं पाए जाते हैं और ये स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक है. कई केस मिले हैं जिसमें रोगी की मौत के बाद पता चला है कि उसको कोरोना वायरस हो चुका था. हालांकि अभी इस पर कोई साफ रिसर्च नहीं है कि बिना लक्षण वाले रोगियों के लिए यह कितना खतरनाक है.

जिन लोगों को बिना लक्षण वाला कोरोना है वो साइलेंट किलर की तरह भी होता है उसका असर फेफड़ों, हार्ट और शरीर के अंगों पर भी पड़ता है और ये अचानक से हमला करता है.

लेकिन गांव-घर में लोगों को अति आत्मविश्वास के शिकार हैं जिन लोगों को कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है और उनको कोई दिक्कत नहीं हो रही है वो लापरवाही से इधर-उधर घूम रहे हैं जबकि उनको भी डॉक्टर की निगरानी में रहकर और जरूरी दवाइयां लेते रहना है…

दूसरे ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिनको कोरोना वायरस का प्रकोप हो चुका हो लेकिन उनको इस बात की जानकारी न हो और उनके संपर्क में आप भी आ सकते हैं…. इस हालात में उपाय यही है कि बिना किसी काम के घर से बाहर न निकलें….बार-बार हाथ धोएं, भीड़-भाड़ वाली जगहों पर न जाएं. सोशल डिस्टैसिंग का पालन करें और मॉस्क जरूर पहनें…

और अगर आपको कोरोना नहीं है तो किसी गलतफहमी में बिलकुल न रहें और घर पर रहें….क्योंकि हो सकता है कि आप किसी ऐसे रोगी के संपर्क में आ जाएं जिसको कोई ऊपरी लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं.

लेकिन अगर आप कह रहे हैं ‘हमै तो कुछू जानिन नहीं पड़ि रहा’, हमैं कबो न होई…..तो आप खुद खतरे में हैं और दूसरों को भी खतरे में डाल रहे हैं.

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